नई दिल्ली : विश्व के हर देश में आज हिन्दी बोलने वाले मिल ही जाते हैं चाहे आप जहां भी जाए वहाँ आपको हिन्दी में बात करने वाले अक्सर मिल ही जाते हैं। आप लंदन, पेरिस, न्यूयॉर्क, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, जोहानिसबर्ग, नेपाल, मलेशिया, नागालैंड, रूस, चीन सभी जगह भारतीय नागरिक विशेषकर हिन्दी भाषी लोग मिल ही जाते हैं।

आज पूरे विश्व में हिन्दी बोलने वाले लोग विश्व के हर कोने में मिल जाते हैं। जो बताता हैं कि हिन्दी का प्रचार-प्रसार अब पूरे दुनिया में हो चुका हैं। विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में हिन्दी सिनेमा का मुख्य योगदान रहा हैं। हिन्दी सिनेमा गैर हिन्दी भाषियों को भी अपनी ओर आकर्षित करता हैं।

हिन्दी को अगर हम ज्ञान-विज्ञान और तकनीक की भाषा बना सकें, तो इससे हिन्दी भाषा-भाषियों के सशक्तिकरण की राह भी खुलेगी। आज कल हिन्दी सिनेमा को कई देशों में अपनी भाषा में डब भी किया जाने लगा हैं। जापान एक ऐसा देश हैं जहां सभी उच्च शिक्षण संस्थान में विषय सामग्री अँग्रेजी में न होकर जापानी भाषा में तैयार किया जाता हैं।

परंतु दुर्भाग्य हैं कि भारत में उच्च शिक्षा, मेडिकल, इंजीनियरिंग एवं अन्य शिक्षा का अध्ययन सामग्री हिन्दी में न होकर अँग्रेजी में बनाई जाती हैं। या तो कहे कि उपलब्ध हैं। आज जरूरत हैं हमें 130 करोड़ भारतवासी मिलकर पहल करें कि एक राष्ट्र एक हमारी हिन्दी भाषा हो, चाहे बेसक हम अपने स्थानीय भाषा में भी बात करें, परंतु राष्ट्र को एक सूत्र में बाँधने के लिए हिन्दी राष्ट्र भाषा होनी चाहिए जो भारत जैसे देश के एकता एवं अखंडता के लिए आवश्यक हैं।

आज दुनिया के अनेक देशों के विश्वविद्यालयों और दूसरे संस्थानों में हिन्दी कि शिक्षा दी जा रही हैं। आज जरूरत हैं हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु भारत सरकार एवं राज्य सरकारों के कार्यालयों यहाँ तक की न्यायालयों में भी पत्र व्यवहार एवं सभी कार्यकलाप हिन्दी में ही करने की तभी हिन्दी को उचित सम्मान मिलेगा। केवल एक दो दिन हिन्दी दिवस मनाकर इतिश्री कर लेने से हिन्दी पूरे विश्व की भाषा नहीं बन पायेगी।

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