नई दिल्ली : गांधी जी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान साम्राज्यवादियों को क्रुद्ध कर दिया था। युद्ध के बाद की ब्रिटेन की पीढ़ी ने उन्हें शांति दूर के रूप में भी स्वीकार किया। गांधी व्रितानी साम्राज्य और उसके लोगों के बीच फर्क करते हुए दिखते हैं। बापू ने यह फर्क भर्ता में रह रहे कुछ अंग्रेजों और लंदन के बेसवाँटर में मिले लोगों के बीच महसूस किया होगा। ब्रिटेन में गांधी की बहुत प्रतिमा लगाई गई हैं। पर एक नई मूर्ति 25 नवम्बर को मैनचेस्टर के मेडिवियल में लगाई जाने वाली हैं।

भारत और इंग्लैंड के बीच प्यार और घृणा का रिश्ता रहा हैं। जिसे महात्मा गांधी के जीवन में दिखने को मिलता हैं। गांधी लंदन में कानून की पढ़ाई से अपनी जीवन यात्रा की शुरुयात करते हैं। छात्र जीवन के दौरान गांधी का जीवन लंदन में बिताने का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव वाला काल खंड रहा हैं। लंदन में ही गांधी ने पत्रों का प्रारम्भ तैयार करना, भाषण देना एवं यहाँ तक की याचिका दायर करना भी सीखा।

लंदन का गांधी के जीवन पर इतना प्रभाव हो गया था कि 1909 में गांधी ने कहा था कि भारत के बाद अगर दुनिया में कहीं रहना हो तो मैं लंदन में ही रहना चाहूँगा। लंदन के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने 2015 में पार्लियामेंट स्क्वायर में गांधी की मूर्ति का अनावरण करते हुए कहा था कि उस प्रेरक व्यक्तित्व ने ब्रिटेन में रहकर ही स्वयं को जाना और अपने सच केलिए खड़े हुए। गांधी की मूर्ति लगाकर हम उन्हें सदा के लिए इंग्लैंड में बसा रहे हैं।

गांधी ने अपने विचारों का असर ब्रिटिश नेताओं पर भी जबर्दस्त तरीकें से छोड़ा। गांधी का शाकाहारी सोसाइटी का निर्माण करना, धार्मिक मान्यताओं पर विश्वास करना, मांस और शराब का सेवन नहीं करना, प्राकृतिक चिकित्सा एवं स्वच्छता जैसे अनेक कार्यों का छाप ब्रिटिश लोगों एवं वहाँ के नेताओं पर दिखने को मिलने लगा था। अपनी माँ के द्वारा दिया गया उपदेश मांस और शराब नहीं सेवन करने का वचन भी शायद इन्हीं ब्रिटिश दोस्ती के कारण निभाएँ।

ब्रिटिश नेताओं द्वारा अक्सर कहा जाता हैं कि ब्रिटेन ने भारत को आजाद नहीं किया सच यह हैं कि महात्मा गांधी, सुभाष चंद बॉस, राजगुरु, सुखदेव, लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल, स्वामी सहजानन्द सरस्वती, स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रेणी नेता बाबु राम विलास सिंह जैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने ब्रिटेन को आजाद कर दिया।

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