अष्ट लहूलुहान हुए
कुर्बान हुए वतन के लिए।
आए थे, सुधार के लिए
दूर करने के लिए बुराई’।।

चले गये वे, शेर थे
अपराध के तोड़ में बेजोड़ थे।
हिम्मते मर्दा वे बेजोड़ थे
देख राह छोड़ भागते थे अपराधी।।

देश के दुश्मन किलावासी
पाल रहे अपराधी।
व्यवस्था के पैरोकार हैं वे
दुराचार के भण्डार हैं वे।।

हे प्रभु कर कृपा
लोग समझे सच्चाई।
विवेक हो उनके मन में
वोट दे सच्चे तन को।।

डॉ. श्याम बाला राय
अध्यक्ष साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ
नई दिल्ली प्रदेश 

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