रात 9 बजकर 8 मिनट पर दुष्कर्म पीडि़ता का शव दिल्ली से गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। बेटी का शव देख बूढ़े मां-बाप गश खाकर गिर गए। अंतिम संस्कार को लेकर संशय बरकरार था। डीएम परिजनों से बात करने के लिए रात 10 बजे तक गांव में डेरा जमाए थे। हालांकि पिता ने शव आने से पहले रात में अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया था। इससे रात में भी कई थानों का फोर्स गांव में मौजूद रहा।

रात की खामोशी में सुनाई दे रही थीं सिसकियां

जैसे-जैसे अंधेरा गहरा रहा था, शव आने की प्रतीक्षा कर रहे परिजनों की बेचैनी बढ़ रही थी। एंबुलेंस दरवाजे पहुंचने पर शव निकल कर बाहर रखा गया बेटी का चेहरा देख बूढ़े पिता और मां पछाड़ खाकर गिर गए। बहन भाभी, चाचा-चाची समेत अन्य परिजन रो-रोकर बेहाल हो गए। गांव मे छायी खामोशी को रात में गूंजी सिसकियां चीरने लगी। किस तरह बूढ़े पिता और मां-बाप को होश आया तो मृतका की सबसे छोटी बहन जो इलाज के समय से साथ थी पिता के गले लिपट कर चीख पड़ी कि पापा हम दीदी को नहीं बचा पाए। यह सुन वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों की आंखें भी नम हो गई। बाद में परिवार और गांव वालों के साथ दोनों मंत्रियों और सपा के नेताओं ने भी फूल श्रद्धांजलि दी।

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