गुजरात : राष्ट्र सृजन अभियान के स्वप्नद्रष्टा महान स्वतंत्रता सेनानी, स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रेणी नेता, किसान नेता, समाज सुधारक बाबु राम विलास सिंह जी की 25वीं पुण्यतिथि गुजरात राज्य के पोरबंदर में मनाई गई।

राष्ट्र सृजन अभियान के स्वप्नद्रष्टा बाबु राम विलास सिंह जी का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। बिहार के जहानाबाद जिले के मखदुमपुर रेलवे स्टे्शन से दो किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित खस्कोचक बाबु राम विलास सिंह जी की जन्मभूमि हैं।

पिता साधुशरण सिह संयुक्त परिवार में आठ भाइयों के बीच सबसे बडे़ थे। इनके इकलौते पुत्र के रूप में जन्में बाबु राम विलास सिंह जी का बचपन लाड़-प्यार में बीता। किसी शिक्षा प्रेमी किसान के घर पर जाकर इन्होंने प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की थी।

राष्ट्र सृजन अभियान के स्वप्नद्रष्टा बाबु राम विलास सिंह जी द्वारा समाजसेवा का जो कार्य शुरु किया गया था। उसका निर्वाह उन्होंने जीवन पर्यंत किया। उनके यहाँ जो पहुँच जाता वह भोजन किए विना वापस नहीं होता। दूसरों का दुःख-कष्ट वे देख सह नहीं पाते थे।

राष्ट्र सृजन अभियान के स्वप्नद्रष्टा बाबु राम विलास सिंह जी ने बिहार गया के कलक्ट्रीयट के ऊंचे कंगुरे यर विदेशी शासन का झण्डा ‘यूनियन जैक’ हटाकर उसकी जगह स्वराज का झंडा फहराया था। हटाए गए यूनियन जैक को बाबु राम विलास सिंह जी ने लपक लिया जो आज तक राष्ट्र सृजन अभियान के पास सुरक्षित हैं। दनादन गोलियों चलने लगी। रामविलास सिंह के पैर में भी गोली लगी। गोली का शिकार होकर घायल अवस्था में ये 14 दिनों तक विष्णु पद के नाले में घायल पड़े रहे।

95 वर्ष को शतकीय आयु में 7 सितम्बर 1994 को एक आतुर वाहन (एम्बुलेंस) में उन्होंने अंतिम सांस ली। बिहार गया के केन्द्रीय कारा के पास इनकी मृत्यु होना एक स्वतंत्रता सेनानी के लिए सिर्फ संयोग नहीं हो सकता हैं अपितु विष्णुपद वाले इसे कर्मफल मानते हैं। इनके इकलौते पुत्र शिक्षाविद् राम प्रताप सिह जी भी अब नहीं रहे लेकिन स्वतंत्रता सेनानी बाबु राम विलास सिंह जी ने अपने पीछे एक भरा पूरा परिवार छोड़ा हैं।

राष्ट्र सृजन अभियान के स्वप्नद्रष्टा बाबु राम विलास सिंह जी के पौत्र राष्ट्र सृजन अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय चिंतक व विचारक एवं राष्ट्रवादी वक्ता प्रद्युम्न कुमार सिन्हा अपने दादा जी की पुण्यतिथि पर प्रति वर्ष स्वतंत्रता सेनानी बाबु राम विलास सिंह स्मृति न्यास अन्तर्गत धर्मार्थ, शिक्षा-उन्नयन एवं दलितोत्थान के लिए दान हैं।

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