लेखन की व्यथा

हे निष्ठुर जीवन साथी।
हर पल हर क्षण वसता मन में।।
पर भाव हैं भावभूमि नहीं।
मिलना कितना कष्टकर।।

एक रक्तबूद से एक शब्द।
घिसक सिसक कर खिसका वाक्य।।
भावावेश से भाव बना।
पर लिखना कितना कष्टकर।।

आनन्द दिया जीवन में आकर।
व्यस्त किया हर पल हर क्षण।।
तू काम दिया सम्मान दिया।
पर तूझे पाना कितना कष्टकर।।

डॉ. श्याम बाला राय
अध्यक्ष साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ
नई दिल्ली प्रदेश  

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