नई दिल्ली, पीटीआइ। आयुष मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हर्बल काढ़े की एक रेसिपी सौंपी है और उसके वाणिज्यिक उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कहा है। दावा किया गया है कि यह काढ़ा कोविड-19 के खिलाफ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा करता है। मंत्रालय का कहना है कि यह फॉर्मूलेशन लोगों के स्वास्थ्य हित में है और प्रधानमंत्री ने भी इसका समर्थन किया है।

आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी) मंत्रालय द्वारा 24 अप्रैल को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे पत्र के मुताबिक, ‘तुलसी, दालचीनी, सोंठ और काली मिर्च के फॉर्मूलेशन की आयुष क्वाथ या आयुष कुदिनीर या आयुष जोशांदा के नाम से उत्पादन और बिक्री की जाएगी। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया जाता है कि वे आयुष लाइसेंस प्रदाता अधिकारियों को निर्देश दें कि वे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 के प्रावधानों के मुताबिक आयुर्वेद/ सिद्धा/ यूनानी के लाइसेंसधारी दवा निर्माताओं को उपरोक्त फॉर्मूलेशन के उत्पादन के लिए लाइसेंस या मंजूरी प्रदान करने पर विचार करें।’मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, इस एडवाइजरी के क्रम में कई हर्बल उत्पादों की निर्माता एक कंपनी ने ‘आयुष क्वाथ’ के नाम से पहले ही इसके उत्पादन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एमिल फार्मा के प्रबंध निदेशक केके शर्मा ने कहा कि यह फॉर्मूलेशन जल्द से जल्द पाउडर और टेबलेट की शक्ल में बाजार में उपलब्ध होगा।

उन्होंने कहा, ‘आयुष क्वाथ में मंत्रालय द्वारा सूचीबद्ध सभी जड़ी-बूटियां होंगी। कई रिपोर्टो में दर्शाया गया है कि कोरोना वायरस ऐसे लोगों के लिए घातक है जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। भारतीय पारंपरिक व्यवस्था में ऐसी कई जड़ी-बूटियां हैं जो प्रतिरोध क्षमता को मजबूत कर सकती हैं और कई बीमारियों को दूर रख सकती हैं।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रविवार को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में आयुष स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के इस्तेमाल पर जोर दिया था।

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