रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र गए मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के अंतौली गांव के युवक औरंगाबाद में रेल हादसे का शिकार हो गए। शहडोल के 11 श्रमिकों की मौत हो गई। शनिवार को इस गांव में एक साथ नौ अर्थियां उठेंगी। यह लोग एक ही मोहल्ले के रहने वाले थे। नौ लोग रिश्तेदार हैं। रिश्तेदारों में चार सगे भाई और चाचा-भतीजा हैं। पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। अंतौली गांव में रहने वाले रामनिरंजन के तीन बेटे थे। इनमें से दो रावेंद्र और निर्वेश स्टील कंपनी में काम करने गए थे। दोनों हादसे का शिकार हो गए।

इसी प्रकार गजराज सिंह के दो बेटे और दो बेटियां थीं। गजराज के दोनों बेटे बुद्घराज सिंह और शिवदयाल सिंह भी इस हादसे का शिकार हुए हैं। वहीं चाचा धन सिंह के साथ काम करने गया दीपक सिंह भी हादसे का शिकार हो गया। रामनिरंजन और गजराज सिंह भी रिश्ते में दूर के भाई लगते हैं। दोनों खुश थे कि उनके दो-दो बेटे आज घर आने वाले हैं। रामनिरंजन सुबह से खेत का काम निपटा रहे थे और गजराज सिंह घर की तैयारी में जुटे हुए थे। तभी अधिकारियों ने घटना की जानकारी दी। गजराज सिंह के परिवार के पालन-पोषण की जवाबदारी उनके दो बेटों पर थी और दोनों हादसे का शिकार हो गए। अब सिर्फ दो बहनें बची हैं।

एक दिन पहले की थी बात

हादसे का शिकार हुए लोगों ने गुरवार को स्वजनों से बात की थी। सबने बताया था कि वे लोग औरंगाबाद से ट्रेन पकड़कर सीधे घर आ जाएंगे। बेटों ने बताया था कि उनके पास खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। जो रुपए पास में थे उसमें से 40 रुपए किलो चावल खरीदकर खा रहे हैं। अब वह भी नहीं बचा, इसलिए वे किसी भी हाल में घर आना चाहते हैं। पिता गजराज ने बताया कि बेटे ने कहा कि मैंने कुछ पैसे बचा लिए हैं, घर के खर्च में काम आएंगे।

अगले माह निर्वेश की होनी थी शादी

निर्वेश सिंह गोंड की शादी पास के ही लहबर गांव में तय हुई थी। अगले माह उसकी शादी की तैयारी घर वाले कर रहे थे। निर्मेश के एक जीजा की भी मौत इस हादसे में बताई जा रही है लेकिन प्रशासन अभी तक नाम की पुष्टि नहीं कर पाया है। बताया यह जा रहा है कि पिछले साल ही उसकी बहन की शादी हुई थी। जीजा भी उनके साथ काम करने जालना गया था।

पिता ने मना किया था

रामनिरंजन और गजराज को जब यह खबर लगी कि उनके बेटे आ रहे हैं तो दोनों ने उन्हें मना किया कि अभी मत आओ कोरोना है और प्रशासन किसी को बाहर नहीं निकलने देता। इस पर बेटों ने जवाब दिया कि आना जरूरी है क्योंकि यहां अब कुछ खाने को नहीं मिल रहा है। मालूम हो, जालना से औरंगाबाद 35 किलोमीटर पैदल सफर तय करने के बाद पैर दुखने लगे तो श्रमिक रेल की पटरियों पर आराम करने लगे। आराम करते-करते श्रमिकों को झपकी लग गई और इसी बीच तेज रफ्तार मालगाड़ी पटरियों पर सो रहे मजदूरों के ऊपर से निकल गई। शहडोल-उमरिया के 16 लोगों की मौत इस दुर्घटना में हो गई।

कांग्रेस ने मप्र सरकार को घेरा

रेल हादसे को लेकर मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कहा है कि वे रोज बयानबाजी के बजाय कुछ करके दिखाएं। सरकार बताए कि जिन मजदूरों की मौत हुई या घायल हुए, उनका क्या प्रवासी मजदूर के रूप में पंजीयन था और उनकी वापसी के लिए क्या इंतजाम किए गए थे? कमल नाथ ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

उधर, कैबिनेट मंत्री व उमरिया के मानपुर से विधायक मीना सिंह ने नईदुनिया को बताया कि मुख्यमंत्री ने मृतकों के स्वजनों को पांच-पांच लाख रुपये, वहीं एक घायल को उपचार के लिए एक लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है। औरंगाबाद से भी यह जानकारी सामने आई है कि महाराष्ट्र सरकार ने भी मृतकों के स्वजनों को पांच-पांच लाख रुपये देने की घोषणा की है।

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