वश्विक महामारी के समय दिल बड़ा करे सरकार, मनरेगा में काम के दिनों को 250 दिनों तक करना प्रवासी मज़दूरों के हित में  – स्वामी अग्निवेश

30-05-2020,नई दिल्ली

प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बंधुआ मुक्ति मोर्चा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष दलसिंगार ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं बंधुआ मुक्ति मोर्चा के संस्थापक, प्रसिद्ध समाजसेवी स्वामी अग्निवेश ने केंद्र सरकार के द्वारा मनरेगा में कार्य के दिनों और मज़दूरी को बढ़ाना स्वागतयोग्य बताया। साथ ही सरकार को चेताया कि राज्यों द्वारा निर्धारित न्यूनतम मज़दूरी को ध्यान में रखना अत्यंत आवश्यक हैं जिससे कि मज़दूरों को न्यायपूर्ण अधिकार से वंचित न होना पड़े।

स्वामी अग्निवेश ने इस बात पर जोर देकर कहा कि  भारत के संविधान के अनुच्छेद 23 में यह स्पष्ट किया हुआ है कि किसी भी श्रमिक को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मज़दूरी से कम मज़दूरी पर काम करवाना संविधान के अनुच्छेद 23 में प्रदत्त मौलिक अधिकार का उलंघन हैं और  बंधुआ मज़दूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम 1976 के अनुसार न्यूनतम मज़दूरी से कम मज़दूरी पर काम करवाना बंधुआ मज़दूरी को बढ़ावा देना माना जायेगा।  उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकारें ऐसा करती हैं तो सरकार स्वयं बंधुआ मज़दूरी को बढ़ावा दे रही है।श्रम कानूनों में कई राज्यों द्वारा बदलाव किये जाने पर मानवाधिकार का उलंघन बताते हुए गहरी चिंता व्यक्त की और राज्य सरकारों से पुनः न्याय संगत श्रम कानूनों को बहाल करने की भी मांग की है।

उन्होंने याद दिलाया कि अकुशल श्रमिकों के लिए केंद्र सरकार के द्वारा मनरेगा में 202 रूपया प्रतिदिन 8 घंटे के लिए निर्धारित किया गया है. वही उत्तर प्रदेश में अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मज़दूरी 331.73रूपया हैं। इसी तरह अन्य राज्यों में अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मज़दूरी सुनिश्चित की गई है। इसलिए बाकी बचे हुए रुपये राज्य सरकार को वहन करना आवश्यक हैं । साथ ही उन्होंने कहा कि मनरेगा में काम के दिनों को 250 दिनों तक बढ़ाया जाय और कृषि कार्य को भी मनरेगा से जोड़ा जाए. जिससे कि इस संकट के घड़ी में मज़दूरों को राहत मिलेगी।  अधिकतर मजदूरों का जो प्रवासी के रुप मे कार्यरत हैं, उनका न तो श्रम विभाग मे पंजियन हैं और न ही मनरेगा जॉब कार्ड. अगर इन मुद्दो को ध्यान मे रखकर सरकार कार्य करें तो इन प्रवासी मजदूरों को शायद भविष्य मे प्रवासी मज़दूर बनने की आवश्यकता ही ना पड़ें.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here