लाखों पेड़ों को लगवाया अपने जीवन काल में और उन्हें जिन्दा रखने का भी प्रयास किया

के. सी. श्रीवास्तव

चकिया चन्दौली।‘‘रूप तेरा ऐसा कि दर्पण में ना समाए’’। कुछ ऐसी ही छवि हमारे क्षेत्र के प्रतिष्ठित ख्यातिप्राप्त कई प्रकार की विभूतियों से विभूषित व कई पुरष्कार प्राप्त बृक्ष बंधु परशुराम सिंह जी की है। यह कहना अतिशयोक्ति नही होगी कि इतनी सारी विभूतियों को ग्रहण करने के साथ ही साथ कभी भी किसी से किसी प्रकार का मनमुटाव भी नही हुआ। सबके साथ प्रेम भाव व समरसता का भाव उनके ह्दय में जागृत रहा करता है। जिन्होने कभी किसी का कोई नुकसान नही होने दिया और जिसके लिए कोई भी चीज बड़ी नही है। इन्हे सर्वप्रथम सन् 2007 ई0 में बृक्ष बंधु का सम्मान प्राप्त हुआ तो कि उ0प्र0 सरकार की तरफ से दिया गया था। इसके बाद तो फिर अलंकरणों की लाइन ही लग गई। कृषि विविधिकरण के लिए आप को विश्वबंधु,2014 में उत्तर प्रदेश चेतना रत्न,2016 में चन्दौली अलंकरण से सम्मानित होने के साथ ही साथ 2017 ई0 में आप को भूमिभूषण सम्मान से भी नवाजा गया। कई बार आप चुनाव आयोग के स्वीप आईकान भी रह चुके है। आज भी आप राष्ट्रसृजन अभियान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पर्यावरण वोर्ड के सदस्य है। सबसे बड़ी मजेदार बात तो यह है कि चाहे कोई भी मंच हो चाहे जैसे भी लोग है आप को सामंजस्य बैठाने में ज्यादा समय नही लगता। इस प्रकार हम देखते है कि हमारे क्षेत्र की ही माटी में कई प्रकार के लाल छिपे है। आप ने अब तक लाखो पेड़ों को लगवाया और जिन्दा भी रखने का कार्य किया है। आज इस लांक डाउन के दौर में भी आप ने असहायों की सेवा में कोई कसर बाकी नही छोड़ी है। इनके लिए सिर्फ इतना कहना कि दिल में मोहब्बत का होना जरूरी है वरना याद तो रोज दुष्मन भी किया करते है।

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