अब वक्त आ गया कि सैन्य बजट को 3 से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया जाय   

दिल्ली। राष्ट्रसृजन अभियान के सह राष्ट्रीय अध्यक्ष व अन्र्तराष्ट्रीय चिन्तक व विचारक डाॅं पी के सिन्हा ने कहा कि अब चीन की दादागिरी भारत कत्तई बर्दाश्त नही करेंगा। उन्होनें कहा कि भारत और चीन के बीच पिछले काफी दिनों से लद्दाख में चल रहा तनाव दिन प्रतिदिन गहरा होता जा रहा है। लद्दाख की गरवा घाटी में सोमवार की रात्रि चीनी सेना की कार्यवाही को श्री सिन्हा ने अति दुर्भाग्यपूर्ण बतलाते हुए कहा कि हमारे जवानों की शहादत बेकार नही जायेगी!
1975 ई0 के बाद पहली बार ऐसा मौका आया है कि भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प में हमारे सैनिको की शहादत हुई है। दोनो देशो के बीच बातचीत का दौर चलने के बीच चीन द्वारा इस तरह का कदम कत्तई उचित नही ठहराया जा सकता है। हमे चीन के चाल और इरादों को समय रहते और इस चतुराई से निडर होकर सामना करना है कि हम कही से भी किसी भी मामले में हल्के न दिखाई दे। हमे लगता है कि चीन हमे घेर रखा है लेकिन वास्तव में हमने उसे घेर रखा है। जिससे चीन बौखलाया हुआ है। हम भारतीय सेना के मनोबल की बात करे तो वह विश्व की मजबूत सेनाओं में से एक है। हमारे भारतीय सैनिक 18 हजार किमी की उॅचाई पर भी लड़ने में सक्षम है। इतनी उचाई पर मुकाबला करने की कूबत शायद किसी और देश के सैनिको के पास नही है। चीन भी समझता है कि इस तरह की लड़ाई मे वह भारतीयों से पार नही पा सकता है। क्यो कि यह मोदी का भारत है। हमारी भारतीय सेना बहुप्रशिक्षित है। इसके सामने चीन की प्यूपिल लिबरेशन आर्मी को लड़ने का भी अनुभव नही है। जब कि भारत ने लगातार लड़ाई लड़ी है। मोदी के भारत को चीन से भयभीत होने की कत्तई आवश्यकता नही है। हमारी सेनाओं का मनोबल चरम पर है । और समय आ गया है कि भारत सरकार सैन्य बजट को तीन प्रतिशत से बढ़ाकर पाॅच प्रतिशत कर दे। शान्ति की जरूरत तो ऐसे दोनो देशो को है । भारत व चीन विश्व की दो बड़ी ताकते है। अगर ए उलझती है तो अस्थिरता निश्चित रूप से फैलेगा जिसका खामियाजा दोनो देशों को भुगतना होगा। जिस स्तर पर तनाव चल रहा है जल्द नीचे आने वाला नही है लेकिन बातचीत बढ़ाने की पहल करनी पड़ सकती है। भारत को पिछे नही हटना है बल्कि घाटी में अपनी पकड़ को और ज्यादा मजबूत बनानी होगी। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण घाटी में सड़कों का जाल अक्साई चीन,दौलतबेन,आल्डी गजवान घाटी में विछाने की जरूरत है।ताकि हम चीन को मुहतोड़ जबाव दे सके।

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