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ते नर वर थोड़े जग माही के विग्रह, महान स्वतंत्रता सेनानी राम विलास सिंह जी

डॉ जंगबहादुर पाण्डेय पूर्व अध्यक्ष, हिंदी विभाग, राँची विश्वविद्यालय, राँची 9431595318

दैनिक सृजन नेशनल न्यूज नेटवर्क ब्यूरो रिर्पोट नई दिल्ली। सम्पूर्ण राष्ट्र में स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इस सिलसिले में देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। यह महोत्सव जन भागीदारी के साथ जन-उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। साथ ही राष्ट्र सृजन अभियान अपने स्वप्नद्रष्टा एवं सृजन क्रान्ति के प्रणेता कहे जाने वाले बाबू रामविलास सिंह जी की सत्ताइसवी पूण्य तिथि मना रही है। जिसका कार्यक्रम 27 शहरो में आयाजित किया जा रहा है।
भारत जब गुलाम था ,तो भारत माता को गुलामी से आजाद करने के लिए अनेक महापुरुषों का भारतवर्ष में पदार्पण हुआ। जिनमें राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव, रानी लक्ष्मीबाई, देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद, लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, स्वामी सहजानन्द सरस्वती, बिहार केसरी श्री बाबू, बाबू अनुग्रह नारायण सिंह सर गणेश दत्त, धरती आबा बिरसा मुण्डा आदि। इन्हीं महापुरुषों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की परम्परा में जहानाबाद जिलाअन्र्तगत मखदुमपुर प्रखंड के खलकोचक ग्राम में 10 फरवरी 1894 को पिता बाबू साधुशरण सिंह एवं माता शारदा देवी के एकलौते पुत्र के रूप में जिस नवजात शिशु का जन्म हुआ, उसका नाम कुलगुरू ने रामविलास रखा। बाबू रामविलास सिंह जी के एकमात्र सुपुत्र राष्ट्रनायक, शिक्षारत्न राम प्रताप सिंह शर्मा एवं इकलौती सुपुत्री श्रीमती लालपड़ी देवी थी। पूत के पाँव पालने में दिखाई पड़ जाते हैं।

रामविलास बाबू ने ब्रिटिश शासन की क्रूरता को अपनी आँखों से देखा था और शरीर से झेला था। 16 वर्ष की आयु में ही वे स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे और वे जीवन पर्यंत देश सेवा में जुटे रहे। उन्होंने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे, और गया समाहरणालय पर श्यूनियन जैकश् उतारकर तिरंगा फहरा दिया था। उनका सपना था आजाद और आत्मनिर्भर भारत। जब तक आजादी नहीं मिली ,वे चैन की नींद नहीं सो सके। उनका आधा सपना 15 अगस्त 1947 को पूरा हुआ, शेष पूरा होने के रास्ते पर है। उनके पौत्र डाॅ प्रद्युम्न कुमार सिन्हा संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्र सृजन अभियान के द्वारा उनके सपनों को साकार करने में लगे हैं।राष्ट्र सृजन अभियान दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव श्री ललितेश्वर बाबू व महासचिव के रूप में गीता जेठवा इस पुनीत अभियान में पी के सिन्हा का साथ दे रहें हैं। प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी राम विलास बाबू के सपनों और राष्ट्र सृजन अभियान के संकल्पों को अमली जामा पहनाने में भारत भारती के जिन सपूतों और राष्ट्र भक्तों का अप्रतिम और अविस्मरणीय योगदान है उनमें प्रमुख हैं- परम पूज्य राष्ट्र संत श्री रमेश भाई ओझा,सांसद सह केन्द्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह, सांसद कविता सिंह(सिवान)प्रो आलोक कुमार राय(कुलपति,लखनऊ)प्रो अवध किशोर राय(पूर्व कुलपति,मधेपुरा) डा एस.पी.सिंह(कुलपति दरभंगा)डा अरविन्द कुमार (पूर्व कुलपति,हजारी बाग,मगध) डा कामिनी कुमार(कुलपति, रांची)डा फारुख अली (कुलपति, छपरा) डा हरिकेश सिंह (पूर्व कुलपति छपरा) डा धर्मेन्द्र तिवारी (पूर्व कुलपति आरा) डा राम जी राय आरा ,साहित्यकार सह समाज सेवी डा हरिवल्लभ सिंह आरसी,जमशेदपुर,प्रो सत्यदेव राय,दिल्ली, डा सुधांशु कुमार शुक्ल,(पोलैंड)प्रो.नीलू गुप्ता(अमरिका) डा विनोद कुमार मिश्र (मारिशस) प्रो सुरेश चंद्र शुक्ल(नार्वे)मानस कुमार पाण्डेय (दुबई) अर्चना पाण्डेय एवम् अमित कुमार (फीनलैंड)ज्योतस्ना पाण्डेय ,देवेश रंजन एवम् सृजन त्रिवेदी (दिल्ली) कविवर शंभु शिखर, डा गीता जेठवा ,डा नलिनी पुरोहित, श्री मती तारा मणि पाण्डेय ,प्रो नागेन्द्र नारायण, स्वामी कलानंद सरस्वती, डा प्रशांत गौरव,डा विष्णु जायसवाल, डा चंद्र मणि किशोर,मन्नुओझा,अशोक कुमार प्रमाणिक, गनौरी राम,प्रमोद कुमार राय,प्रभु शर्मा, आदि प्रमुख हैं। राष्ट्र सृजन अभियान का विश्व सर्वव्यापी है बेटर मी, बेटर बी,बेटर वल्र्ड के सपनों को साकार करना ही राष्ट्र सृजन अभियान का संकल्प है। अमर स्वतंत्रता सेनानी रामविलास बाबू कर्मठ एवं धुन के मतवाले थे। ऐसे ही कर्मठ योद्धाओं के लिए राष्ट्रकवि दिनकर ने लिखा है कि – नींद कहाँ उनकी आँखों में जो धुन के मतवाले हैं।गति कह तृषा और बढ़ती है जब पड़ते पग में छाले हैं।।जागरूक की जय निश्चित है हार चुके सोने वाले। लेना अनल किरीट भाल पर और आशिक होने वाले।।
अपने तप, त्याग और सेवापरायणता के कारण आज भी बाबू रामविलास सिंह जी स्मरणीय एवं अनुकरणीय है।उनका आकस्मिक निधन 7.9.1994 को हो गया।उनकी 27 वी पुण्य तिथि पर संपूर्ण देश में अनेकानेक कार्यक्रम हो रहे हैं।ऐसे ही राष्ट्र भक्तों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राष्ट्र कवि दिनकर ने लिखा है. वीर तुम्हारा लिए सहारा,टिका हुआ है भूतल सारा।होते तुम न कहीं तो,कब का उलट गया होता संसार नमन उन्हे मेरा शत-शत बार।

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