कलाय शाकं भेदि स्याल्लघु तिक्तं त्रिदोषजित-डा. चांदनी गुप्ता

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सकलडीहा से श्रवण कुमार की रिर्पेाट
सकलडीहा,चंदौली । कलाय शाकं भेदि स्याल्लघु तिक्तं त्रिदोषजित अर्थात मटर की पत्तियों का शाक मल भेदन करने वाला, पचने में हल्का, तिक्त रस युक्त, तीनों दोषों को जीत लेता है। यह बहुत ही लाभकारी है। यह उक्त बातें रविवार को ताजपुर गांव में आयोजित आयुर्वेद जनजागरण शिविर को सम्बोधित करती हुयी आयुष जन चिकित्सालय की आयुर्वेदिक-युनानी एवं पंचकर्म चिकित्सक डा. चांदनी गुप्ता ने उपस्थित लोगों के बीच कही। बताया कि आयुर्वेद एक औषधि ही नहीं बल्कि यह धर्म और व्यक्ति का जीवनशैली है। इसके अपनाने से हर इंसान लम्बी आयु के साथ आनन्दमय जीवन जी सकता है। वहीं उसके अन्दर सदाचार का उदय भी होता है। आगे बताया कि आज देश के हर लोगों के बीच आयुर्वेद पहुंचना चाहिए। इसके लिए भारत सरकार प्रयासरत है। एक मरीज के पाचनक्रिया के गड़बड़ी के प्रश्न पर संस्कृत में बताया कि भोजनाग्रे सदा पथ्यं जिह्वाकंठविशोधनम अग्निसंदीपनं हृद्यम् लवणार्द्रकभक्षणम् अर्थात भोजन के थोड़ी देर पूर्व थोड़ी अदरख और संेधानमक चबाकर खाने से (इसके बाद पानी नहीं पीना) पाचन शक्ति प्रणाली सुचारू होती है और रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। जीभ और हृदय स्वस्थ रहता है, गले की बीमारी नहीं होती है और स्वास्थ्य ठीक रहता है। यह पथ्य भी है और आयुर्वेद में परीक्षित भी है। यह क्रिया प्रतिदिन करने से हर व्यक्ति पाचनतंत्र को मजबूत कर सकता है। इस मौके पर 72 मरीजों का पंजीयन कर चिकित्सकीय सेवा दिया गया। आयोजन में वैद्य रंगनाथ, पीएम जन आयुर्वेदिक औषधि केन्द्र के प्रदेश प्रभारी योगेश कुमार प्रजापति, आयुर्वेद जन जागरण प्रभारी श्रवण कुमार सहित अन्य रहे।

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