Home ENTERTAINMENT एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय तरंग संगोष्ठी (वेबीनार) का आयोजन

एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय तरंग संगोष्ठी (वेबीनार) का आयोजन

दैनिक सृजन नेशनल न्यूज़ नेटवर्क नई दिल्ली ।शनिवार को कालजयी कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 141 वीं जयंती के अवसर पर सच्चिदानंद सिंहा कॉलेज औरंगाबाद एवं विश्व संस्कृत हिंदी परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय तरंग संगोष्ठी (वेबीनार) का आयोजनहुआ । “वर्तमान परिपेक्ष में प्रेमचंद की प्रासंगिकता” विषय पर संगोष्ठी दो सत्र में संपन्न हुआ प्रथम सत्र 10:30 पूर्वाहन से 1:00 अपराह्न तक तथा दूसरा सत्र 2:30 अपराहन से 5:00 बजे तक निर्धारित किया गया था । इस अंतरराष्ट्रीय तरंग संगोष्ठी में भारत के अतिरिक्त वर्षा विश्व विद्यालय, पोलैंड एवं नीदरलैंड से हिंदी के वानभट्ट विद्वान विशिष्ट वक्ता के रूप में जुड़कर मुंशी प्रेमचंद को मानवता का साहित्य बताया। नीदरलैंड की डॉक्टर पुष्पिता अवस्थी ने कहा कि साहित्य के बिना मनुष्य संवेदन शून्य हो जाता है, मुंशी प्रेमचंद की 300 कथाएं वर्तमान परिस्थितियों का समाधान के साथ प्रतिनिधित्व करता है। प्रथम सत्र की शुरुआत करते हुए गुरु नानक विश्वविद्यालय, अमृतसर के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर पाण्डेय शशि भूषण ‘शीतांशु’ ने कहा कि जनक जी एवं याज्ञवल्क्य के बीच संशय को उद्धत करते हुए मुंशी प्रेमचंद जी के साहित्य को रोशनी देने वाला साहित्य बताया। गोदान के अदृश्य प्रश्न का उजागर किया । गोदान केवल शोषण और ॠण केंद्रित नहीं है । उद्घाटन भाषण मगध विश्वविद्यालय के कुलपति माननीय डॉ राजेंद्र प्रसाद ने की। उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद वर्तमान जीवन जीने की बीज मंत्र हैं। स्वागत संबोधन सच्चिदानन्द सिन्हा कॉलेज के प्राचार्य एवं संगोष्ठी के उप संरक्षक डॉ वेद प्रकाश चतुर्वेदी जी ने कहा इनकी कथाओं में ग्रामीण परिवेश की झलक मिलती है जिसमे भारतीय संस्कृति की परिपक्व होने के बिज छिपे हुए हैं। रांची विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग के डॉक्टर जंग बहादुर पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि प्रेमचंद का साहित्य स्वभाविक, स्वाधीन एवं पुनर्निर्माण का विषय है। इनका साहित्य यथार्थ का मसाल प्रस्तुत करता है मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष हिंदी विभाग भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के डॉक्टर सतीश कुमार राय शामिल हुए ।संगोष्ठी (वेबीनार) का प्रथम सत्र का संचालन डॉ ज्योति गौतम सहायक प्रोफेसर हिंदी विभाग डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ के द्वारा की गई । प्रथम सत्र की शुरुआत डॉ प्रियंका कुमारी संगीत शिक्षिका उच्च विद्यालय छपरा के द्वारा सरस्वती वंदना से की गई। इसके बिज वक्तव्य डॉक्टर जे पी पांडे पूर्व अध्यक्ष हिंदी विभाग रांची विश्वविद्यालय रांची, विशिष्ट वक्तव्य डॉ सुधांशु कुमार शुक्ला, अतिथि प्रोफेसर आईसीसीआर चेयर वर्षा विश्वविद्यालय पोलैंड, डॉक्टर हरिमोहन कुलपति जेएस विश्वविद्यालय शिकोहाबाद एवं डॉक्टर बीना शर्मा निर्देशक केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के द्वारा प्रस्तुति दी गई। अध्यक्षीय वक्तव्य डॉक्टर पांडे शशि भूषण शीतांशु पूर्व प्रोफेसर एवं अध्यक्ष हिंदी विभाग गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के द्वारा दिया गया। मुख्य वक्ता डॉक्टर सतीश कुमार राय मुंशी प्रेमचंद के शुरुआती जीवन से लेकर उनकी कृतियों को बहुत ही सरल भाषा में बताया उन्होंने प्रेमचंद की कृतियां जैसे कफन, नमक का दरोगा, पंच परमेश्वर, गोदान आदि को विस्तार पूर्वक चर्चा की । धन्यवाद ज्ञापन एवं मुंशी प्रेमचंद के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा एमबीए हेड प्रोफेसर भीम बहादुर सिंह के द्वारा किया गया । 2:30 अपराहन से 5:00 अपराहन तक चलने वाले द्वितीय सत्र का संचालन एमबीए हेड प्रोफेसर भीम बहादुर सिंह, सिन्हा कॉलेज औरंगाबाद ने की। दूसरे सत्र की शुरुआत ऋतुजा मिश्रा एवं राधा, फिल्मी गायिका मुंबई के द्वारा सरस्वती वंदना से की गई । उद्घाटन वक्तव्य डॉक्टर पांडे शशि भूषण सीतांशु , गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर ने की । अध्यक्षीय वक्तव्य डॉक्टर तालकेश्वर सिंह पूर्व प्रोफेसर हिंदी विभाग मगध विश्वविद्यालय बोधगया के द्वारा दिया गया। बताते चलें कि डॉक्टर तालकेश्वर सिंह स्नातक की पढ़ाई सच्चिदानंद सिंहा कॉलेज से की है, उन्होंने कहा कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि मैं उसी महाविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहा हूं जिसका मैं छात्र रहा, प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा महाविद्यालय उत्तरोत्तर आगे बढ़ता रहे ।बेविनार में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ प्रदीप कुमार सिंह प्रोफेसर एवं अध्यक्ष हिंदी विभाग वसंत साठे कॉलेज मुंबई के रूप में शामिल हुए। धन्यवाद ज्ञापन शशि भूषण सिंह के द्वारा किया गया, समवेत धन्यवाद डॉ नागेंद्र नारायण संयोजक टेक्निकल हेड एलपीयू जालंधर के द्वारा किया गया। इस पूरे कार्यक्रम में महाविद्यालय के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वेबीनार एवं सेमिनार आयोजित करने वाले एमसीए हेड प्रोफेसर शशि भूषण सिंह, राजीव रंजन, अरुण त्रिपाठी, अनूप कुमार, अमित कुमार डोली कुमारी, नीतू सिंह, नेहा कुमारी, राजकुमार पटेल, प्रकाश दयाल, शशिकांत कुमार एवं अन्य माध्यमों से भारत के अतिरिक्त लगभग 300 से ज्यादा हिंदी के विद्वान जुड़े दोनों सत्रों में कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के द्वारा किया गया।

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