हर वर्ष सिमटता ही जा रहा आरक्षित वनभूमि का भू भाग

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बृजेश केशरी

चंदौली वन विभाग का प्रयास केवल गुड वर्क का तोहफा लेने तक

दैनिक सृजन नेशनल न्यूज नेटवर्क नौगढ़,चंदौली।शासन की पहल पर हर वर्ष वनविभाग लाखों रूपये की राजकीय धनराशि ब्यय करके हजारों पौध रोपण तो कराता है।जिसका सफलता प्रतिशत भी कागजो मे मानक के अनुरूप दिखलाकर प्रभागीय वनाधिकारी भी उच्च पदस्थ अधिकारियों से गुड वर्क का तोहफा ले लेते हैं।


लेकिन इस ओर किसी का ध्यानाकर्षण नहीं हो पा रहा है कि जब हर वर्ष आरक्षित वनभूमि का भू भाग सिमटता ही जा रहा है और पूर्व के वर्षों में रोपित पौधों का विकास कागजो मे उच्च लेवल का है तो निश्चय ही वह पेड़ बन गया होगा।इसके बाद भी हर वर्ष पौध रोपण का लक्ष्य निर्धारित करके अग्रिम मृदा कार्य भी कराता है।
पूर्व के वर्षों मे रोपण कराए गए पौधों की सुरक्षा व झाड़ी सफाई ईत्यादि कार्यों पर भी लाखों रूपये ब्यय किए जा चुके हैं।
वनविकास के लिए प्रतिबद्ध सरकार जहां हर वर्ष वनविभाग का लाखों रूपये का बजट स्वीकृत करती है वहीं ग्राम पंचायतों व कुछ सरकारी विभागों के माध्यम से भी राजकीय धनराशि ब्यय करके पौध रोपण का कार्य होता है।साथ ही स्वयंसेवी संस्थाओं व समाजसेवी द्रय भी पौधरोपण करके फोटो खिंचवाने मे मशगूल रहते हैं।
पूर्व में संचालित रही जायका परियोजना भी वनो मे वृद्धि करने का जिम्मा उठाई लेकिन स्धिति यथावत रह गई।
प्रदेश के वनो मे अपनी पहचान बनाए रखने में कामयाब रहा काशी वन्य जीव प्रभाग रामनगर का चकिया नौगढ चन्द्रप्रभा मझगाई जयमोहनी वन रेंज के जंगल की शोभा वनतूलसिया की झाड़ियां ही बढा रही है।जिसका तीव्र गति से हो रहा विस्तार हरियाली की शमां बांध रही है।
जानकारो की माने तो उपरोक्त वन रेंजो मे व नौगढ क्षेत्र के ग्राम पंचायतों में हुए पौधरोपण का मात्र 20 वर्षों तक का अभिलेख खंगाले जाने पर निश्चित रूप से यह प्रतीत होने लगेगा कि आगे पौधरोपण कराने के लिए न तो आरक्षित वनभूमि का भू भाग अवशेष है और न ही ग्राम समाज व अन्य सरकारी भूमि ही।

 स्थलीय सत्यापन कराए जाने पर स्थिति दिखेगी बद से बदतर

पौध रोपण का कार्य वनविभाग के लिए दुधारू गाय के समान- के पी जायसवाल

पर्यावरण दिवस वन महोत्सव ईत्यादि के आयोजन मे सरकारी विभागीय अधिकारी कर्मचारी अर्धसरकारी संस्थाओं के लोग व समाजसेवी तथा आम नागरिक तो यह शपथ लेते हुए दिखते हैं कि पौधरोपण करना जीवन का मुख्य उद्देश्य है जिसकी देखभाल भी पेड़ बनने तक की जाएगी।लेकिन इसके बाद सभी लोग अपना अपना कर्तब्य भूल जाते हैं।
भाजपा मण्डल महामंत्री के पी जायसवाल ने बताया कि पौध रोपण का कार्य वनविभाग के लिए दुधारू गाय के समान है।और उच्चाधिकारी भी स्थलीय सत्यापन मे यह नहीं देख पाते हैं कि वास्तविक रूप से जंगल का विकास ब्यय राजकीय धनराशि के सापेक्ष हुआ भी है या नहीं।बताया कि पौधरोपण कार्य कराने वाले की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।तभी वनो के विकास की कल्पना की जा सकती है।
नौगढ क्षेत्र के जंगलों में आंवला हर्रा बहेड़ा महुआ पियार विजयसार साखू खैर तेन्दू ईत्यादि कीमती पेड़ो का भरमार हुआ करता था जो कि अब विलूप्तता के कगार पर दिनो दिन पहुंच रहा है।

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